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Hindi Diwas Poem 2021 हिंदी दिवस पर कविता

Hindi Diwas Poem
Written by The Cosmos Tips

दोस्तों, हमारे देश में कई सारी भाषाए बोली जाती है. सभी भाषाओ का अपना अपना महत्व है. सभी भाषाए अपने स्थान पर और स्थानीय लोगो में प्रचलित है. उत्तर भारत में अधिकतर हिंदी भाषा बोली जाती है, पूर्वांचल में भोजपुरी, मैथिली आदि भाषाए बोली जाती है, तो वही उत्तर प्रदेश में भी ब्रज, अवधी, आदि भाषाए प्रचलित है. पर उत्तर भारत की मुख्य भाषा में हिंदी भाषा आ जाती है. वही यदि आपको हिंदी भाषा आती है तो आप इस भाषाओ तो थोडा बहुत समझ भी सकते है. उसी प्रकार हमारे दक्षिण भारत में तमिल, कन्नड़, मलयालम आदि भाषाए बोली जाती है. भारत में सभी राज्यों की अपनी भाषा और अपनी संस्कृति है. पर आज हम Hindi Diwas Poem के बारे में बात करेगे और हिंदी दिवस पर कविताओ के विषय में जानेगे. Hindi diwas poem in hindi

हिंदी दिवस पर कुछ श्रेष्ठ कविओ की कविताये – Poetry on hindi diwas

  1. भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी की कविता – हिंदी दिवस पर कविता

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल, बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।
अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन, पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन।
उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय, निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय।
निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं न ह्यैहैं सोय, लाख उपाय अनेक यों भले करे किन कोय।
इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग, तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग।
और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात, निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात।
तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय, यह गुन भाषा और महं, कबहूं नाहीं होय।
विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार, सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।
भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात, विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात।
सब मिल तासों छांड़ि कै, दूजे और उपाय, उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय।

2. अटल बिहारी वाजपेयी जी की कविता – हिंदी दिवस पर कविता

चौराहे पर लुटता चीर
प्यादे से पिट गया वजीर
चलूँ आखिरी चाल कि बाजी छोड़ विरक्ति सजाऊँ?
राह कौन सी जाऊँ मैं?

सपना जन्मा और मर गया
मधु ऋतु में ही बाग झर गया
तिनके टूटे हुये बटोरूँ या नवसृष्टि सजाऊँ मैं?
राह कौन सी जाऊँ मैं?

दो दिन मिले उधार में
घाटों के व्यापार में
क्षण-क्षण का हिसाब लूँ या निधि शेष लुटाऊँ मैं?
राह कौन सी जाऊँ मैं ?

3. सावित्री नौटियाल काला की कविता – हिंदी दिवस पर कविता

आवो हिन्दी पखवाड़ा मनाएँ, अपनी भाषा को ऊँचाईयों तक पहुँचाएँ
हम सब करेंगे हिन्दी में ही राज काज, तभी मिल पायेगा सही सुराज
हिन्दी के सब गुण गावो, अपनी भाषा के प्रति आस्था दर्शाओ
जब करेंगे हम सब हिन्दी में बात, नहीं बढ़ेगा तब कोई विवाद।

हिन्दी तो है कवियों की बानी, इसमें पढ़ते नानी की कहानी
हम सबको है हिन्दी से प्यार, मत करो इस भाषा का तिरस्कार।
हम सब हिन्दी में ही बोलें, अपने मन की कुण्ठा खोजें
जब बोलेंगे हम हिन्दी में शुद्ध, हमारी भाषा बनेगी समृद्ध।

हिन्दी की लिपि है अत्यंत सरल, मत घोलो इसकी तरलता में गरल
सबके कण्ठ से सस्वर गान कराती, हमारी भारत भारती को चमकाती।
यही हमारी राजभाषा कहलाती, सब भाषाओँ का मान बढाती
हम राष्ट्रगान हिन्दी में गाते, पूरे विश्व में तिरंगे की शान बढ़ाते।

हमारी भाषा ही है हमारे देश की स्वतंत्रता की प्रतीक
यह है संवैधानिक व्यवस्था में सटीक
हम सब भावनात्मकता में है एक रखते है हम सब इसमे टेक
यह विकास की ओर ले जाती सबका है ज्ञान बढ़ाती।

हिन्दी दिवस पर करें हम हिन्दी का अभिनंदन
इसका वंदन ही है माँ भारती का चरण वंदन।

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हिंदी दिवस कब मनाया जाता है ? क्यों ?

प्रत्येक वर्ष हिंदी दिवस 14 सिसम्बर को मनाया जाता है. 14 सिसम्बर 1949 में संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया था कि ‘हिंदी भारत की राजभाषा होगी’ और फिर उसके बाद सन 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को हिंदी दिवस मनाया जाने लगा. हिंदी दिवस को 14 सितम्बर को मनाने के पीछे यह तथ्य है की 14 सितम्बर 1949 को हिंदी भाषा के विद्वान राजेंद्र सिंह का 50वां जन्मदिन था, जिन्हेंने हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए बहुत संघर्ष किया था. आजादी के बाद हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाने के लिए कई कवियों और लेखको ने अथक प्रयास किये है.

निष्कर्ष – दोस्तों आज हमने हिंदी दिवस और Hindi diwas poem के बारे में बात की यदि आपका इस विषय से जुडा हुआ कोई भी प्रश्न है तो आप हमे comment कर सकते है, हम आपकी हर संभव मदद करेगे.

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