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Diwali Essay In Hindi दीवाली पर निबंध

Hindi Essay Of Diwali
Written by Cosmos Tips

दोस्तो,आज हम diwali essay in hindi यानी कि दीवाली पर निबंध लिखेगे और दीवाली के विषय मे चर्चा करेंगे कि दीवाली हम क्यो मानते है आदि कई महत्वपूर्ण विषयों के विषय मे चर्चा करेंगे। diwali essay in hindi Hindi essay about diwali

प्रस्तावना – मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और त्योहारो का आयोजन उसकी इसी प्रवत्ति का परिणाम है। प्रत्येक समाज मे विभिन्न प्रकार में त्यौहारों का आयोजन किया जाता है। ये त्यौहार आनंद की अभिव्यक्ति और जीवन मे नवीनता एवं सरसता, सामाजिक एकता, समृद्धि एवं पारस्परिक स्नेह के प्रतीक होते है। हमारे देश भारत वर्ष में अनेक प्रकार के त्यौहार मनाये जाते है। इसमें कुछ धार्मिक, कुछ सामाजिक, और कुछ राष्ट्रीय त्यौहार होते है। कुछ त्यौहार बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाये जाते है जोकि निम्न है – होली, दीवाली, राक्षबन्धन, दशहरा आदि।

दीवाली क्यो मनाई जाती है ? दीवाली पर निबंध

दोस्तो, दीवाली मनाने से जुड़ी भिन्न भिन्न मान्यताये है। हमारा देश त्यौहारों का देश है। त्यौहार मनाने की युग युगांतर से चली आ रहीं इस परम्परा के तौर तरीके तथा रंग रूप समय से साथ साथ बदलते रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार – नरक चतुर्दशी के दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध कर लोगो को उसके भय से मुक्त किया था। तभी से उल्लास के रूप में यह पर्व मनाया जाने लगा। और एक यह भी मान्यता है कि – भगवान द्वारा बलि को पाताल लोक का राजा बनाने पर देवराज इंद्र ने स्वर्ग के बच जाने की ख़ुशी में दीपको का प्रकाश कर इस त्यौहार का प्रारंभ किया। पर आज की पीढ़ी जो कथा जानती है वह श्री राम के 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की ख़ुशी के साथ जुडी है. इस प्रकार आज दीपावली मानाने का सबसे मुख्य कारण राजा रामचंद्र की रावन की रावण पर विजय तथा उसके उपरांत अयोध्या आने की बात मानी जाती है. रामचंद्र जी के सकुशल घर आने की ख़ुशी में अयोध्यावासियो ने दीप-माला प्रज्वलित कर उनका स्वागत किया था. तब उनकी याद में दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा. इससे भिन्न जैन धर्म के अनुयायी इस पर्व का सम्बन्ध तीर्थंकार महावीर द्वारा इसी दिन मुक्ति प्राप्त करने से मानते है.

एक अन्य कथा के अनुसार इसी अवसर पर भगवन विष्णु ने वामन अवतार का वेश घारण करके राजा बलि के आधिपत्य से लक्ष्मी को मुक्ति दिलाई थी. आर्यसमाजी इसे स्वामी दयानंद सरस्वती के निर्वाण-दिवस के रूप में मानते है. कहानी यह भी है की सिखों के गुरु गोविन्द सिंह के कारागार से मुक्ति पाने की ख़ुशी में दीप जलाकर दीपावली के रूप में मनाया जाने लगा. इसके अतिरिक्त दीपावली मनाने का एक सामाजिक कारण भी है. वास्तव में, वर्षा-ऋतु में घरो में सीलन एवं गंदगी आदि काफी एकत्र हो जाती है. इस सबसे मुक्ति पाने के लिए सगाई के पर्व के रूप में दीपावली का आयोजन किया जाता है. इसी मौसम में खरीफ की फसल तैयार हो जाती है. अतः फसल के घर पहुचने के हर्ष एवं उल्लास के उपलक्ष में भी दीवाली के त्यौहार मनाया जाता है. (diwali essay in hindi)

दीवाली पर्व का आयोजनDiwali Essay In Hindi

दीवाली का आयोजन कार्तिक कृष्ण-पक्ष की त्रयोदशी से लेकर शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि पर किया जाता है. त्रयोदशी को धनतेरस कहते है. इस दिन बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. इसके बाद चतुर्दशी को छोटी दीवाली होती है. जिसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है. इस दिन भगवन कृष्ण ने नरकासुर को मारा था. मुख्य दीवाली अमावस्या को मनायी जाती है, और उसके दुसरे दिन भैया-दूज का त्यौहार आता है. दीवाली का पर्व कार्तिक महीने की अमावस्या की काली रात को मनाया जाता है, परन्तु घर-घर में जल उठने वाली दीपमालाए इस अमावस्या को भी पूर्णिमा में परिवर्तित कर देती है. रंग-विरंगे कंडील तथा पुते हुए रंग-बिरंगे चौक, घरो की शोभा को निराला रूप प्रदान करते है. घरो के अतिरिक्त बाजारों एवं दुकानों में भी भरपूर सजावट की दूर दूर तक प्रशंसा की जाती है.

दीवाली के दिन लक्ष्मी जी का पूजन भी बड़ी श्रद्धा के साथ किया जाता है. व्यापारी लोग अपने वहीखातो की भी पूजा करते है. ऐसी धारणा है की दीवाली पूजन का वर्ष पर्यन्त आर्थिक स्थिति पर विशेष प्रभाव पड़ता है. इस कारण प्रत्योक परिवार श्री गणेश और लक्ष्मी जी की स्थापना और पूजा सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में करना चाहता है. गुरुदेव ब्रहस्पति के अनुसार – कार्तिक अमावस्या को सूर्यास्त के बाद सर्वप्रथम ‘लक्ष्मी योग‘ आता है. यह मुहूर्त सामान्य गृहस्थजनो के लिए शुभ कहा जाता है. इसके बाद आने वाला ‘इंद्रयोग’ सरकारी अधिकारियो और राजनेताओ के लिए विशेष अनुकूल होता है. तत्पश्चात ‘कुबेर योग’ व्यापारियों एवं उद्योगपतियो के लिए विशेष लाभदायक सिद्ध होता है. धनतेरस को सायंकाल घर के प्रवेश द्वार के बहार, दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीप दान करने से अकालमृत्यु का भय दूर होता है. धनतेरस से भैया दूज तक के पाच दिनों में घर में अखंड दीपक प्रज्वलित रखने से पाचो तत्व संतुलित हो जाने पर समस्त वास्तु दोष साल भर के लिए निष्प्रभाव हो जाते है. और सात जन्मो से चली आ रही निर्धनता भी दूर हो जाती है. दीवाली के दिन पटाखे तथा तरह तरह की आतिशबाजी चलने का प्रचलन है. इस घूम घड़ाके से सारा वातावरण ही गुंजायमान हो जाता है. दीवाली के दिन सभी लोग अपने अपने मित्रो व संबंधियों के घर जाते है तथा बधाई एवं मिठाइयो का आदान प्रदान भी करते है. कुल मिलकर पूरा वातावरण उत्साह, उल्लास और स्नेह से भर उठता है. परन्तु इस महान पर्व के साथ एक बुरा एवं निंदनीय प्रचालन भी जुडा हुआ है. और वह है जुआ खेलना. बहुत से व्यक्ति इस अवसर पर बहुत अधिक जुआ खेलते है जिससे कई घर बर्बाद हो जाते है. जुआ खेलना एक कानूनी अपराध एवं सामाजिक बुराई है. इससे अनेक घर एवं परिवार नष्ट हो जाते है. दीवाली जैसे महान पर्व के अवसर पर ऐसा घ्रणित कार्य करना शोभा नही देता. इसके अतिरिक्त कभी कभी पटाखे एवं आतिशबाजी भी विभिन्न दुर्घटनाओं का कारण बन जाती है.

निष्कर्ष – निश्चित रूप से दीवाली ( diwali essay in hindi ) का पर्व एक महान सामाजिक-सांस्कृतिक पर्व है. जो लोगो को उत्साह, स्फूर्ति तथा सौहार्द्र प्रदान करता है. यह पर्व सामाजिक एकता का प्रकाश पर्व है. इसलिए हम लोगो का दायित्व है की हम इस पर्व को तथाकथित दोषों से मुक्त करके इसका महत्त्व और भी अघिक बढ़ा दे. त्यौहार हमारी सांस्कृतिक उन्नति के प्रतिक है. इनको अधिक से अधिक परिष्कृत बनाना हमारा दायित्व है.

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